What is OSI Model in hindi (OSI model क्या है हिंदी मे जाने)

OSI model (open system interconnection) एक प्रकार का structure है जो बताता है की नेटवर्क मे डाटा को केसे ट्रान्सफर करना है  मतलब एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर मे डाटा को केसे ट्रान्सफर किया जाता है|

OSI Model को वर्ष 1970 मे ISO (International Organization for Standardization) को तैयार किया गया था, जबकि दूसरा अंतर्राष्ट्रीय टेलीग्राफ और टेलीफोन परामर्श समिति CCITT (Consultative Committee for International Telephony and Telegraphy) द्वारा किया गया था इन दोनों International Bodies ने ऐसा network model विकसित किया जो की समान नेटवर्किंग मॉडल को परिभाषित करता है।

वर्ष 1983 मे दोनों मॉडल जो ISO CCITT के माध्यम से तेयार किया गया था इन दोनों मॉडल को एक साथ जोड़ दिया गया और उसको ISO का बेसिक रेफरेंस मॉडल नाम दे दिया गया इसलिए इसको रेफरेंस मॉडल के नाम से भी जाना जाता है|



OSI Model  मे 7 लेयर्स होती है लेकिन ये काफी दिलचस्प सवाल है की पहली लेयर कौनसी होती है  Physcial layer इसकी पहली लेयर  है या Application layer इसकी पहली लेयर है  तो ये निर्भर करता है की आप sender side है या recevier side है|
अगर आप sender side पर है तो आपके लिए पहली लेयर होगी Application layer क्यूंकि sender के comunication के लिए सबसे पहले touch मे आएगी Application layer  और अगर आप receiver side तो आपके लिए लेयर पहली होगी Physcial layer क्यूंकि receiver के  comunication के लिए सबसे पहले touch मे आएगी Physcial layer

The 7 Layers of the OSI Model & Networking (OSI Model और Networking की 7 परते)

OSI MODEL
OSI MODEL 


Physcial layer :

OSI Model की सबसे पहली लेयर फिजिकल लेयर होती है यह लेयर नेटवर्किंग मे डिवाइसेस के बिच मे फिजिकल कनेक्शन बनाती है और रिसीवर के लिए ये सबसे पहली लेयर होती है क्यूंकि रिसीवर सबसे पहले कम्युनिकेशन के लिए इस लेयर संपर्क में आता है फिजिकल लेयर मे वो सभी फंक्शन और टास्कस  करते है जो एक नेटवर्क केबल और कनेक्टर में होते है फिजिकल लेयर को प्रेजेंटेशन लेयर भी कहा जाता है फिजिकल लेयर बाइनरी नंबर, डिजिटल, केबल, सिग्नल कनेक्टर, ट्रांसमिशन, हब आदि पर कार्य करती है|



Data link Layer :

OSI Model की यह लेयर डाटा पैकेट पर mac address (media aaccess control address) जैसे की 00-15-E9-21-99-8B को कनेक्ट कर देती है जिससे डाटा कौनसी मशीन पर जाना है यह पता किया जाता है mac address मशीन का address होता है IP address को बदला जा सकता है लेकिन mac address को बदला नही जा सकता है यह हर मशीन का एक यूनिक एड्रेस होता है data link layer mac address को डाटा पैकेट पर लगा देती है जिससे डाटा उसी मशीन पर ट्रान्सफर होता है डाटा पैकेट पर mac address लगाया जाता है जिसे फ्रेम कहा जाता है जैसे की ईमेल पर mac address लगाना, swtich mac address पर कार्य करता है|



Network layer 

नेटवर्क लेयर में डाटा पर IP Taging किया जाता है IP Taging मतलब डाटा पर IP का टैग लगाया जाता है (source IP address - मतलब अपने कंप्यूटर का IP address) (Destination IP address - मतलब अपने सर्वर मशीन का IP address) Interenet में काफी डाटा आता जाता रहता है लेकिन यूजर को डाटा किस सर्वर पर भेजना है और वापस लेना है ये कार्य नेटवर्क लेयर की सहायता से डाटा पर IP taging करके किया जाता है इस लेयर में IP Taging, Router’s, IP-IPX( Internet packet exchange protocol) आदि कार्य करते है|



Transport layer :  

ट्रांसपोर्ट लेयर को OSI Model की सबसे बड़ी लेयर कहा जाता है इस लेयर की सहायता से यह सुनिचिता किया जाता है की डाटा की end to end to delivery हुई है ट्रांसपोर्ट लेयर में TCP-UDP का उपयोग किया जाता है TCP (transmission control protocol) यह गारंटी लेता की source से लेकर destination तक डाटा 100% पहुचायेगा| TCP server को request भेजता है और acknowledgement लेता है और verify करता है TCP मे segmentation होते है बड़े डाटा को छोटे - छोटे टुकडो मे तोड़ता है UDP का पूरा नाम user datagram protocol होता है ट्रांसपोर्ट लेयर मे UDP कोई acknowledgement नही लेता है, verfication नही करता है और नही कोई data delivery की गारंटी लेता है TCP-UDP में segmention-fregmention or data error dectation का उपयोग होता है|



Session Layer :

जब हम किसी सर्वर से कनेक्ट होते है अपने ब्राउज़र की सहायता से तो पर्टिकुलर पोर्ट्स 1, 2, 3 के जरिये रिक्वेस्ट सर्वर के पास जाती है और सर्वर उस कंप्यूटर के लिए एक सेशन बना देता है मतलब पर्टिकुलर टाइम के लिए कंप्यूटर सर्वर से कनेक्ट हो जाता है पर्टिकुलर सेशन एक कंप्यूटर मे एक ही बार बनता है और एक कंप्यूटर मे दो सेशन नही बन सकते है जैसे की Online SBI की साईट का सेशन एक बार ही बनता है पर्टिकुलर कंप्यूटर मे और पर्टिकुलर ब्राउज़र मे| इसमे सभी सर्विसेज के लिए पोर्ट्स होते है ये अलग अलग पोर्ट्स को मैनेज करती है|
उदहारण : इन्टरनेट बैंकिंग की वेबसाइट एक कंप्यूटर ब्राउज़र मे ओपन करने के बाद हम उसी कंप्यूटर के उसी ब्राउज़र मे new tab ओपन करके वही इन्टरनेट बैंकिंग की साईट ओपन नही कर सकते है क्यूंकि इन्टरनेट बैंकिंग सर्वर ने पहले से ही सेशन बना दिया है सर्वर के पास पहले से कंप्यूटर की रिक्वेस्ट सेशन के लिए जा चुकी है|



Prensentation Layer : 

यह डाटा का फॉर्मेट क्या है किस टाइप का डाटा रा है या भेजा जा रहा है उस डाटा को प्रेजेंटेशन लेयर recognize करती है मतलब डाटा को analysis करती है साथ ही डाटा का फॉर्मेट recognize करके ये डाटा को किसी algoritham का उपयोग करके encrpt कर देगी ताकि जो डाटा भेजा जाने वाला है वह डाटा बिच मे हैक हो सके जैसे उदहारण के लिए कपिल ने डाटा भेजा तो यह डाटा को %[email protected]()@#)#$! मे बदल देता है तथा वापस डाटा प्राप्त करते वक़्त यह डाटा को de-cryption कर देता है presentation layer डाटा फॉर्मेट, encrption or de-crption का कार्य करती है|

Application Layer :

कोईभी ऐसा सॉफ्टवेर या एप्लीकेशन जो यूजर को इन्टरनेट से कम्युनिकेशन करवाता है एप्लीकेशन लेयर के अंतर्गत आता है जैसे Gmail, Yahoo, Facebook, AOL MAIL, Hotmailआदि यह यूजर को इंटरफ़ेस प्रोवाइड कराता है कोई भी फाइल मतलब विडियो कॉल करना, मेल सेंड करना यह सभी FTP (File Transfer Protocol) की सहायता से किया जाता है एप्लीकेशन लेयर मे FTP, SMTP, HTTP, Telnet Protocol आते है एप्लीकेशन का मुख्य कार्य यूजर को नेटवर्क से सॉफ्टवेर के जरिये जोड़ना है|





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